Friday, January 8, 2016

ठोकर मारो धार्मिक गुलामी को

ठोकर मारके तो देखो
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1 ठोकर मारो धार्मिक गुलामी को।
2 ठोकर मारो पूर्वजों के हत्यारों को जो देवता बने हुए हैं।
3 ठोकर मारो उन किस्से व कहानियों को जो हमें नीच व उन्हें उंच बताते हैं।
4 ठोकर मारो उन परम्पराओं को जो उंच नींच सिखलाती हैं।
5 ठोकर मारो उस( राम राम) को जिसे सुबह शाम आते जाते सोते बैठते किया करते हो।
6 ठोकर मारो व्रत , तीज व त्यौहारों को जिनके नाम पर हम लुटते हैं ।
7 ठोकर मारो पंडे और पुजारियों को।
8 ठोकर मारो तिलक, कलावा , लाल, काले धागे व ताबीजों को।
9 ठोकर मारो जी हजूरी व गांव की मजदूरी को।
10 ठोकर मारो गुरबत और गुलामी को।
11 ठोकर मारो ठोक ठोक कर मारो डटकर मारो किस्मत , भाग्य , नसीब व ऊपर वाले की कृपा को।
12 ठोकर मारो करवा चौथ, भय्या दूज , रक्षा बंधन, अचौटे , पचौते, जात लगाना, जागरण करना , बकरा काटना व होली और दिवाली को।
साथियो मेंने ने तो ठोकर मार दी आप ये पवित्र काम कब करने जा रहे हैं ?
- आप भी ठोकर मारना सीख सकते हैं यह बिल्कुल मुफ्त सिखाई जाती है।
-हिम्मत जुटाइए, अगर एक ठोकर सदियों की गुलामी से मुक्ति दिलाने में मदद करती हो तो !कैसा सोचना
मारो ठोकर

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जातिवादी चेहरा एक बार पुनः बेनकाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चन्द्रचूड का जातिवादी चेहरा एक बार पुनः बेनकाब -----
साथियों दलितों -पिछड़ों की एकता अब धीरे - धीरे रंग ला रही है ।इसका एक उदाहरण लोकायुक्त चयन के मामले में सामने आया,जब मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता माननीय स्वामी प्रसाद मौर्या जी द्वारा न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह को लोकायुक्त नियुक्त करने पर सहमति बनी लेकिन मुख्य न्यायाधीश चन्द्रचूड (जो लखनऊ १५ गाड़ियों के साथ कई जजों को लेकर दबाव वनाने के लिए पहुंचा था ) न्यायमूर्ति संजय मिश्रा को लोकायुक्त बनाने पर अड़ा रहा ,देर रात तक कोई सहमति न वन पाने पर मुंख्यमंत्री और विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा ,फिर आप ही सरकार चलाइये ,आप ही विधायिका और कार्यपालिका का काम भी देखिये । चन्द्रचूड द्वारा संजय मिश्रा की सिफारिश को मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद द्वारा सिरे से खारिज कर दिया गया ।आज जब मामला सुप्रीमकोर्ट में सामने रखा गया तो ,माननीय सुप्रीमकोर्ट द्वारा मुख्य न्यायाधीश चन्द्रचूड को फटकार लगायी गयी कि आप न्यायपालिका की सीमाओं को लांघने का प्रयास वंद  करो और विधायिका व कार्यपालिका बनना बंद करो ।और यह भी कहा कि - जब विपक्ष के नेता और मुख्यमंत्री द्वारा न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह को लोकायुक्त वनाने की आपसी सहमति बन चुकी है तो मुख्य न्यायाधीश की सहमति या असहमति कोई मायने नहीं  रखती ।इसलिए वीरेन्द्र सिंह को लोकायुक्त नियुक्त किया जाय।

(इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा दलितों -पिछड़ों के हितों के साथ समझौता न करने के लिए कोटि -कोटि धन्यवाद .....
ज्ञातव्य है कि न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह पिछड़े वर्ग से हैं )
बस ये तो शुरूआत भर है...........

सक्षम अनुसुचित जातिया, अनुसुचित जन जातिया अवं पिछडा वर्ग अभी भी चरण चाटु

💐👏🙏🏼 साथियों :---
सक्षम अनुसुचित जातिया, अनुसुचित जन जातिया अवं पिछडा वर्ग अभी भी चरण चाटु 

नामकरण संस्कार चलो पाखण्डियों के चरण चाटने

अंधविश्वासी बीमारी चलो पाखण्डियों के चरण चाटने 

जरा सी ख़ुशी मिली चलो पाखण्डियों के चरण चाटने

पढ़ाई में अच्छे अंक आ गए चलो पाखण्डियों के चरण चाटने ।

कोई धंधा नौकरी लग गई चलो पाखण्डियों के चरण चाटने ।

मकान की नींव लगी चलो पाखण्डियों के चरण चाटने 

ग्रह प्रवेश चलो पाखण्डियों के चरण चाटने ।

घर में शादी विवाह चलो पाखण्डियों के चरण चाटने 

तीर्थ यात्रा चलो पाखण्डियों के चरण चाटने 

घर में मृत्यु चलो पाखण्डियों के चरण चाटने

मेलों के नाम पर चलो पाखण्डियों के चरण चाटने 

अनुसुचित जातिया, अनुसुचित जन जातिया अवं पिछडा वर्गके कर्मचारियों यदि इतने चरण तुमने तथागत बुद्ध और बोधिसत्व बाबा साहेब अम्बेडकर के चाटे होते तो तुम इंसान बन चुके होते ।

जब तक तुम पाखण्डी भगवानों के चरण चाटते रहोगे तुम नीच ही कहला ओगे ।

जब तक तुम पाखण्डियों के अश्लील ग्रन्थों का सम्मान करोगे तब तक तुम नीच ही कहला ओगे ।

पाखण्डी भगवानों का कौन सा ग्रन्थ कहता है कि तुम हिन्दू हो ।

पाखण्डी भगवानों का कौन सा मन्दिर कहता है कि तुम हिन्दू हो ।

पाखण्डी भगवानों का कौन सा पुजारी कहता है कि तुम हिन्दू हो ।

पाखण्डी भगवानों की कौन सी मूर्ति कहती है कि तुम हिन्दू हो ।

पाखण्डी भगवानों का कौन सा खान पान तुम्हें हिन्दू मानता है ।

आजादी से पूर्व ऐसे ही पाखण्डी भगवानों के कारण तुम्हारे पुरखे मरे जानवरों का माँस खाने के लिए मजबूर थे ।

आजादी के पूर्व ऐसे ही भगवानों के कारण तुम्हारे पुरखों के नाम घृणास्पद रखे जाते थे ।

आजादी के पूर्व ऐसे ही पाखण्डी भगवानों के कारण तुम दूसरों के कुओं से पानी नही भर सकते थे 

आजादी के पूर्व ऐसे ही भगवानों के कारण तुम्हें शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नही था ।

आजादी के पूर्व ऐसे भगवानों के कारण तुम्हें बोलने तक का अधिकार नही था ।

आजादी के पूर्व ऐसे पाखण्डी भगवानों के कारण तुम्हे पक्के मकानों में रहने का अधिकार नही था ।

आजादी के पूर्व तुम्हें ऐसे पाखण्डी भगवानों के कारण धंधा एवं नौकरी करने का अधिकार नही था ।

आजादी के बाद ये सब अधिकार तुम्हें भारतीय संविधान में बाबा साहेब ने दिलाये और चरण चाट रहे तुम पाखण्डी भगवानों के ।

शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार बाबा साहेब ने दिलाया और चरण चाट रहे तुम पाखण्डी भगवानों के ।

धंधा और नौकरी करने का अधिकार तुम्हें बाबा ने दिलाया और चरण चाट रहे तुम पाखण्डी भगवानों के ।

अच्छे घरों में रहने का अधिकार तुम्हें बाबा ने दिलाया और चरण चाट रहे तुम पाखण्डी भगवानों के ।

आजादी से पूर्व भी आपके ये ही भगवान थे । इन्होंने तुम्हें क्या दिया ? 

बेगारी , लाचारी , भुखमरी , अपमान , बेरोजगारी , बीमारी , छुआछूत , ऊँचनीच , शिक्षाहीनता , दुत्कारता , नीचता , अपनी महिलाओं के साथ अत्याचार एवं दुराचार , अज्ञानता इत्यादि । फिर भी तुमने इन पाखण्डियों को मजबूती से पकड़ा हुआ है । 

इसी कारण तुम्हें शूद्र , राक्षस , दैत्य , अछूत एवं असुर नाम सही दिया हुआ है । 

अपनी इन उपाधियों को छुपाने के लिए तुम इन पाखण्डियों की चकाचौंध की तरफ आकर्षित होते हैं और उस चकाचौंध में जा कर तुम भस्म हो जाते हैं ।

उचित लगे तो निवेदन आगे बढ़ाये। 

मेने अपना फर्ज निभाया अब आपकी बारी हैं।

🐘🐘🐘🐘🐘🐘🐘🐘🐘जय भीम जय सतनाम नमो बुद्धाय👌👍

जातिगत जनगणना के फायदे

अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग महासंघ
जातिगत जनगणना के फायदे .........
१)अगर जातिगत जनगणना हो जाती है तो यह पता चल जाएगा की किस जात की कितनी संख्या है ,और उसको उस अनुपात में आरक्षण द्वारा सरकारी नौकरी दे दी जायेगी ,ताकि सभी जातियों की बेरोजगारी दूर कीजा सके !!
२)जातिगत जनगणना से यह जानकारी मिल जायेगी की कौन सी जात कितनी पढ़ी लिखी है और कौन से जात मेंकितने अनपढ़ है ताकि उन जातियों को विशेष रूप से एजुकेशन लेने के लिए प्रेरित किया जाय और उनकी अशिक्षा दूर की जा सके !!
३)जातिगत जनगणना से OBC की सही आबादी मालुम हो जायेगी ताकि बार बार हाई कोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में बैठे ब्राह्मण यह न बोल सके की हमें ओबीसी की सही आबादी नहीं मालुम है इसलिए उनको रिजर्वेशन कितना दिया जाय यह हम नहीं कह सकत
4)जातिगत जनगणना से तह भी पता चल जाएगा की किस जातियों में कितने IAS IPS IRS IFS कितने टीचर कितने लेक्चरर कितने vice चांसलर है और कितने झाड़ू खाते में है कितने टेम्परेरी है कितने परमानेंट जॉब वाले है ताकि सारी असलियत सामने आ जाए की कौन सी जात का कब्ज्जा कहा है और कौन सी जात कहा कहासे गायब है !!
५)जातिगत जनगणना से सबसे ज्यादा फायदा 52% से जयादा आबादी वाले ओबीसी को होगा क्योकि संख्या मालूम होने पर ही वो उसी अनुपात में भारत के बजट में अपनी भागीदारी माग पायेगा ,मतलब अगर 20 लाख करोड़ का बजट है तो उसके हिस्से में 11लाख करोड़ रुपये आयेंगे
६)जातिगत जनगणना से यह भी पता चल जाएगा की कौन सी जातियों में महिलाए ज्यादा है और कौन सी जातियों में महिलाए कम है ,किस जात में बूढ़े ज्यादा है किस जात में बच्चे ज्यादा है ताकि उस हिसाब से कन्या भ्रूण ह्त्या ,बच्चो का कुपोषण रोका जा सक
े7) जातिगत जनगणना में यह भी पता चल जाएगा की किस जात के पास पक्का मकान है और किस जात के लोग फुटपाथ पर सोकर जीवन बिता रहे है ताकि गरीब और पिछड़ी जातियों को पक्के मकानों का बंदोबस्त कियाजा सके !
८) जातिगत जनगणना में यह भी पता चल जाएगा की किस जात के पास कितनी खेती है कितनी प्रोपर्टी हैऔर कौन सी जात भुखमरी से मर रही है ताकि उन जातियों की दशा सुधारने के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जा सके !
९)जातिगत जनगणना से सभी जातियों को आर्थिक सामाजिक भौगोलिक स्तिथि का सही आकलन हो पायेगा
१०) जातिगत जनगणना भारत में समानता स्थापित कर सभी लोगो को उनकी सभी प्राकृतिक और भौगोलिक संपदाओ में बराबर की भागीदारी सुनिश्चित करेगा
UNITY OF OBC - जागो ओबीसी जागो

 —  with Ssprasad Yadav, ओबीसी महासंघ उत्तर प्रदेश, Køli Bakul Makwana, Dinesh Bhartiye Spyfi, Abu Laeeq Siddiqui,Abhishek Yadav, A Anju Yadav, Abdul Naseer Nasir, Aap Qureshi, Abdullah Neta Ji, Abhai Kumar Verma, Aarohi Patel, Abdul Mujeeb Khan, Aarti Maurya,Aatif Khan, Abhay Mourya, Abigaely Silayo, Abhilash Rajput, Abhi Kumar,Aarti Kushwah, Abhass Bharat,Abhimanyu Simhmar, Abhay Kumar,Abhishek Kushwaha, ओबीसी महासंघ (remove), Abhiraj Mane, Abhishek Verma, Abhishek Shakya, Abhijit Pal,Abhishek Kashyap, Abhishek Singh,Abhishek Maurya, Abhi Kashyap, Abhay Pratap Singh Shakya, Abhishek Yadav,Aamir Jamal Siddiqui, Abhishek Kumar,Abhinav Kashyap, Abnish Kushwaha,Abhi Yadav, Abhaykumar Kushwaha,Abinash Bharti, Abhishek Maurya,Abhimanyu Maurya, Abhishek Arya,Abhishek Singh, Abhinandan Sahni andAbhijeet Maurya

Wednesday, January 6, 2016

डॉ बाबासाहब और ओबीसी O.B.C. का रिश्ता ?'

यह जानकारी OBC तक पहूचाये

डॉ बाबासाहब और ओबीसी का रिश्ता ?''
इस देश में ओबीसी का 'संवैधानिक
जन्मदाता' और 'संवैधानिक रखवाला' कोई और
नहीं बल्कि " बाबासाहब डॉ आंबेडकर''
ही हैं !

1928 में बाम्बे प्रान्त के गवर्नर ने 'स्टार्ट' नाम के एक
अधिकारी की अध्यक्षता में
पिछड़ी जातियों के लिए एक कमिटी नियुक्त
की थी. इस कमिटी में डॉ.
बाबा साहेब आम्बेडकर ने ही शूद्र वर्ण से
जुडी जातियों के लिए " OTHER BACKWARD
CAST " शब्द का सर्वप्रथम उपयोग किया था,
इसी शब्द का शार्टफॉर्म
ओबीसी है !!

जिसको सामाजिक और
शैक्षिक रूप से पिछड़ी हुई जाति के रूप में आज
हम पहचानते है और
उनको पिछड़ी जाति या ओबीसी कहते
है।
स्टार्ट कमिटी के समक्ष अपनी बात
रखते हुए डॉ. बाबा साहेब आम्बेडकर ने देश
की जनसंख्या को तीन भाग में बांटा था.

(1) अपरकास्ट(Upper cast) जिसमे ब्राह्मण,
क्षत्रिय-राजपूत और वैश्य जैसी उच्च वर्ण
जातियां आती थी

(2) बैकवर्ड कास्ट (Backward cast) जिसमे सबसे
पिछड़ी और अछूत बनायी गई जातियां और
आदिवासी समुदाय की जातियों को समाविष्ट
किया गया था ।

(३) जो जातियाँ बैकवर्ड कास्ट और अपर कास्ट के बीच
में आती थी ऐसी शूद्र वर्ण
की मानी गई जातियों के लिए Other
backward cast शब्द का प्रयोग किया गया था,
जिसको शोर्टफॉर्म में हम
ओबीसी कहते है.

बाबासाहब ने ही संविधान के अनुच्छेद 340
धारा में ओ0बी0सी0 को पहचान
उनकी गिनती कर,
उनको उनकी संख्या के अनुपात में जातिगत आरक्षण
का प्रावधान किया !

क्योंकि उस समय तक
ओ0बी0सी0 की जातियों की सूची
ही नही बनी थी।

बाबासाहब ने
ही ओ0बी0सी0 के लिए निर्मित संविधान के अनुच्छेद 340 को लागू कराने
का दबाव ब्राह्मणी कांग्रेस पर डाला !! 

पर ब्राह्मणी कांग्रेस के ब्राह्मण
प्रधानमन्त्री नेहरू इसके लिए तैयार नहीं हुए।

इसीलिए बाबासाहब ने अपने कैबिनेट
मंत्री पद और ब्राह्मणी कांग्रेस
दोनों से इस्तीफा दे डाला

ओ0बी0सी0 के लिए कैबिनेट के मंत्रीपद
को लात मारनेवाले भारत के एक मात्र नेता ' 'बाबासाहब डॉ आंबेडकर''
ही है !!

पर यह बात आज तक ओबीसी से ब्राह्मणों ने
छुपायी
बाबा साहेब के दबाव एवं संवैधानिक बाध्यता के कारण ही बाद में ब्राह्मण
नेहरू ने ब्राह्मण जाति के काका कालेलकर आयोग का गठन
ओ0बी0सी0 की जातियों को पहचान
के लिए बनाया --

संविधान के अनुच्छेद 340 के अनुसार राष्ट्रपति एक
कमीशन नियुक्त करेंगे और कमीशन
ओ0बी0सी0 जातियों की पहचान
कर के उनके विकास के लिए जो सिफारिशें करेगा उनको अमल में
लाया जाएगा।

संविधान के अनुच्छेद 15-(4), 16(4) के
अनुसार ओ0बी0सी0 जातियों के
सरकारी तन्त्र में पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिए सरकार
उचित कदम उठाएगी.

शासन और प्रशासन में प्रभुत्व जमाये बैठे
ब्राह्मणी जातिवादियों ने
ओ0बी0सी0 के लिए नियुक्त
काका कालेलकर कमीशन की रिपोर्ट को संसद की समक्ष
भी नहीं रखा और कालेलकर
कमीशन की रिपोर्ट
को कभी भी मान्यता नहीं दी या लागू
नहीं किया गया।

1978 में केन्द्र सरकार ने ओबीसी जातियों की पहचान और उनकी उन्नति की सिफारिशों के
लिए दूसरा कमीशन
बी0पी0 मंडल
की अध्यक्षता में नियुक्त किया।

मंडल कमीशन रिपोर्ट-1980 को भी सत्ता मे
प्रभुत्व जमाये बैठे जातिवादियों ने लागू करने की जरुरत
न समझी और 1990 तक मंडल कमीशन की रिपोर्ट सचिवालय
की अलमारी में धूल खाती रही।

7 अगस्त 1990 के दिन प्रधानमन्त्री वी0पी0 सिंह की केन्द्र सरकार ने देश के 52 %
ओबीसी समुदाय के लिए मंडल
कमीशन की सिफारिशों के
अनुसार केन्द्रीय नौकरियों में 27 %
ओ0बी0सी0 आरक्षण लागू करने
की घोषणा की,

जिसके विरोध में ब्राह्मणों ने देशभर में मंडल विरोधी आंदोलन प्रारंभ
किया।

इस प्रकार एक सुनियोजित षड़यंत्र के तहत बाबा साहेब डॉ आम्बेडकर को पिछड़े वर्गों का विरोधी बताया जाता है ताकि सदियों से शोषित सम्पूर्ण शूद्र समाज (ओ0बी0सी0 + एस0सी0/एस0टी0) को आपस में लडा कर मलाई काटी जा सके।

और उत्तर प्रदेश में यह काम इन्होंने बखूबी अंजाम दिया है।

अब समय आ गया है कि इनके षडयंत्र को समझते हुए आपस में एकता बनाएं और सम्पूर्ण SC, ST, OBC समाज को मजबूत करें।

यह सन्देश कम से कम 50 ओ0बी0सी0 भाइयों को भेजे। हम सबकी यह 
जीम्मेदारी बनती है।                         जय भीम जय भारत जय मुलनिवासी 🙏🌷

ये न्यायसंगत हे तो लाभ सभी को मिले।

ये न्यायसंगत हे तो लाभ सभी को मिले।
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गुजरात राज्य में पाटीदार अनामत आंदोलन में 74 गुनाहों में दोषी 382 जितने पाटीदारो को जेल से मुक्त करना का फैसला गुजरात की भाजपा सरकार ने लिया है।

गुजरात भाजपा सरकार अपनी सत्ता बचाने के लिए कानून के साथ खिलवाड़ करने जा रही है। कानून में ऐसा कौन सा प्रावधान है कि गुजरात की बसों को सिगरेट की तरह जलाने वालों को, करोडों की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालो को, दूकानों में आग लगाने वालों को, पुलिसकर्मियों के साथ खुलेआम मारपीट करने वालों को, आदिवासी, दलित और ओ. बी. सी के पुलिसकर्मियों के साथ जातिगत भेदभाव रखकर टिप्पणी करने वाले पाटीदारो के सभी गुनाह माफ ? गुजरात भाजपा सरकार का यह फैसला जातिवादी है गैरसंविधानिक है ।

गुजरात की भाजपा सरकार का कहना है कि अनामत आंदोलन में गलती से पाटीदार पर केस दर्ज किया गया था। गुजरात सरकार को वोह जो केस दर्ज किये थे पाटीदारो पर वोह उनकी भूल लग रही है। वाह रे वाह भाजपा सरकार। अपनी सत्ता बचाने के लिए भारतीय संविधान ओर कानून को ही झूठा बना दिया? 
भारतीय संविधान, कानून का उल्लंघन गुजरात भाजपा सरकार खुलेआम कर रही है।

वोटबैंक के खातिर गुजरात की कांग्रेस पार्टी भी दोषी पाटीदारो को निर्दोष बता रही है। क्योंकि उनको भी पाटीदारो के वोट लेने है। अब कांग्रेस पार्टी ने पाटीदारो के लिए आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी को यह नहीं दिखा कि पाटीदारो ने आदिवासी, दलित और ओ. बी. सी को मिल रहे आरक्षण को तोडने की बात कि।

पाटीदारो ने आदिवासी, दलित और ओ. बी. सी के पुलिसकर्मियों ओ के साथ जातिवादी भेदभाव की टिप्पणी करके अपमानित किया था।

कांग्रेस पार्टी ने आज तक सूरत शहर में आदिवासी पुलिस कॉन्स्टेबल दिलीपभाई ईश्वरभाई राठवा की पाटीदारो द्वारा कि गई हत्या के बारे में आवाज नहीं उठाई क्योंकि वोह मरने वाला पुलिस कॉन्स्टेबल आदिवासी था।
कांग्रेस पार्टी वालों ने आज तक इस आदिवासी पुलिस कॉन्स्टेबल के परिजनों को न्याय दिलाने की बात नहीं की।

भाजपा पार्टी वाले ने पाटीदार वोटबैंक को बचाने के लिए दोषी पाटीदारो को जेल से मुक्त करने का निर्णय लिया है। 
अगर छोटे छोटे गुनाह करने वाले पाटीदारो को गुजरात सरकार जेल से मुक्त करने का निर्णय ले सकती हैं तो ऐसे छोटे छोटे गुनाह करने वाले सेंकडो आदिवासी, दलित और ओ. बी. सी ओर मुस्लिम समुदाय के लोग भी सालों से गुजरात की सभी जेलो में छोटे छोटे गुनाहों में जेल में बंद हैं तो गुजरात भाजपा सरकार उन सभी छोटे छोटे गुनाह करने वाले St. Sc. Obc ओर मुस्लिम लोगो को जेल से मुक्त किये जाये । सिर्फ पाटीदारो के लिए ही क्युं कानून बदला जा रहा है। कानून हो तो सभी के लिए समान हो नहीं तो कानून पर से लोगों को विश्वास उठ जायेगा।

आज दो वक्त की रोटी के लिए जंगल से लकडी लाने पर गरीब आदिवासीओ को गुनाहगार बनाकर उन्हे जेल में डाल दिया जाता है। जल जमीन ओर जंगल की रक्षा के लिए लडत चलाने वाले आदिवासी ओ को भाजपा सरकार ने जेल में डाल दिया है उन सभी आदिवासीओ को जेल से मुक्त किया जाये। गुजरात की कांग्रेस पार्टी भी उन आदिवासी, दलित, ओ. बी. सी ओर मुस्लिम समुदाय के लोगों को जेल से मुक्त करने के लिए आवाज उठाये।

प्रो-प्रफूल वसावा

Tuesday, January 5, 2016

देश का 80 करोड़ ओबीसी अब जाग गया है.

*** जानो और जागो ***

"जिसकी जितनी संख्या भारी,
उसकी उतनी हिस्सेदारी"

*** देश का 80 करोड़ ओबीसी अब जाग गया है.***

** भारत में लोकतंत्र लागू है पर इन 68 वर्ष में सरकारों ने यहां ब्राह्मणतंत्र स्थापित कर लिया है, ये रहे सबूत **

(1) राष्ट्रपति - प्रणव मुखर्जी - ब्राह्मण

(2) प्रधानमंत्री - नरेंद्र मोदी - बनिया

(3) ग्रहमंत्री - राजनाथ सिंह - ठाकुर

(4) विदेशमंत्री - सुषमा स्वराज - ब्राह्मण

(5) वित्तमंत्री - अरूण जेटली - ब्राह्मण 

(6) रक्षामंत्री - मनोहर पारीकर - ब्राह्मण

(7) सड़क एवं परिवाहन मंत्री - नितिन गडकरी - ब्राह्मण

(8) महिला एवं बालविकास मंत्री - मेनका गांधी - ब्राह्मण

(9) लोकसभा स्पीकर - सुमित्रा महाजन - ब्राह्मण

(10) प्रधानमंत्री के मुख्यसचिव - न्रपेंद्र मिश्रा - ब्राह्मण

(11) राष्ट्रपति कार्यालय में कुल 49 अधिकारी काम करते है. जिनमें ओबीसी के होने थे 32, जबकि है केवल 0. सामान्य के होने थे 7, जबकि है 49.

(12) प्रधानमंत्री कार्यालय में कुल 53 अधिकारी काम करते है, जिनमें ओबीसी के होने थे 34, जबकि हैं केवल 0. सामान्य के होने थे 8, जबकि है 53.

(13) विदेशी दूतावास में कुल 140 अधिकारी काम करते हैं, जिनमें ओबीसी के होने थे 91, जबकि है केवल 0, सामान्य के होने थे 21 , जबकि है 140.

(14) भारत सरकार में कुल 84 सचिव हैं, जिनमें ओबीसी के होने थे 55, जबकि है केवल 0. सामान्य के होने थे 13 , जबकि है 84.

(15) भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में कुल 27 मंत्री हैं. जिनमें ओबीसी के होने थे 18 , जबकि है केवल 1, सामान्य के होने थे 4, जबकि है 20. 
टाप 10 मंत्रीयों में सो एक भी ओबीसी नहीं.

(16) भारत में कुल 4657 आई.ए.एस. हैं. जिनमें ओबीसी के होने थे 3027, जबकि हैं केवल 655. सामान्य के होने थे 699, जबकि है 2993.

(17) देश के 18 राज्यों के हाईकोर्ट में कुल 481 जज हैं, जिनमें ओबीसी के होने थे 313, जबकि हैं केवल 36. सामान्य जाति को होने थे 72, जबकि है 426.

(18) मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट में कुल 30 जज हैं. जिनमें से ओबीसी के होने थे 20, जबकि है केवल 0. सामान्य जाति के होने थे 5 , जबकि है 30.

(19) भारत के सुप्रीम कोर्ट में कुल 23 जज हैं. जिनमें ओबीसी के होने थे 15, जबकि हैं केवल 0. सामान्य जाति के होना थे 3, जबकि हैं 23.

(20) भारत के 46 विश्वविद्यालयों में कुल 108 कुलपति हैं . जिनमें ओबीसी के होने थे 70, जबकि है केवल 0. सामान्य के होने थे 16, जबकि है 108 

(21) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU ) में कुल 670 प्रोफेसर हैं, जिनमें ओबीसी के होने थे 435, जबकि हैं केवल 0. सामान्य जाति के होने थे 100, जबकि हैं 670.

(22) दिल्ली विश्वविद्यालय ( DU) में  कुल 249 प्रोफेसर हैं. जिनमें ओबीसी के होने थे 162, जबकि हैं केवल 0. सामान्य जाति के होने थे 37, जबकि हैं 249.

(23) जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में कुल 470 प्रोफेसर हैं. जिनमें से ओबीसी के होने थे 305, जबकि हैं केवल 2. सामान्य जाति के होने थे 70, जबकि हैं 426.

(24) आई.आई.एम. लखनऊ में कुल 40 प्रोफेसर हैं, जिनमें से ओबीसी के होने थे 26, जबकि हैं केवल 1. सामान्य जाति के होने थे 6, जबकि है 30.


(25) भारत सरकार के कार्मिक मंञालय की रिपोर्ट 13 फरवरी 2012 के अनुसार दिनांक 01/12/10 तक विभिन्न वर्गों की नौकरी में संख्या और प्रतिनिधित्व निम्न है.

प्रथम श्रेणी में  :-
वर्ग.     संख्या     आरक्षण
सामान्य (15%) - 75.5%,
ओबीसी (65%) - 8.4%

द्वितीय श्रेणी में :-
सामान्य (15%) - 72.2%,
ओबीसी (65%) - 6.1% 

तीसरी श्रेणी में :-
सामान्य (15%) - 61.9%
ओबीसी (65%) - 14.8%

चतुर्थ श्रेणी में :-
सामान्य (15%) - 59%
ओबीसी (65%) - 15.2%

(26) देश के उद्योग जगत की विभिन्न कंपनियों के बोर्ड मेम्बरों की स्थिति निम्न हैं.
Gen -15% - है -92.6%
Sc/St-22%-है -3.5%
OBC- 65% - है-3.8%

(27) म.प्र. की विधानसभा की कुल 230 सीटों में से:-
वर्ग.     संख्या    आरक्षण
Sc -   15% - सीटें- 35  
St -    20% - सीटें- 47
OBC- 65% - सीटें- 00 

(28) भारत की लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, जिनमें :- 
Sc - 15% - सीटें - 84
St  - 7.5% - सीटें-47
Obc -65% -सीटें- 00

(29) देश में आरक्षण की स्थिति :-

वर्ग.      संख्या   आरक्षण
Sc -   15% -    15%
St -    7.5% -   7.5%
Obc-  65%  -   27%

ओबीसी के आरक्षण में क्रीमीलेयर लगाया है जो कि पूर्णयता असंवैधानिक है.

(30) मध्यप्रदेश में वर्तमान में आरक्षण की स्थिति :-

वर्ग.      संख्या      आरक्षण
एससी -  16%   -  16%
एसटी -   20%   - 20%
ओबीसी- 65%   - 14%

जबकि ओबीसी को केरल में 40%, बिहार में 34%, कर्नाटका में 32% और महाराष्ट्रा में 32% आरक्षण है. 

(31) सवर्णों का नौकरी में 79% हिस्सा होने के बाद भी हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने संविधान के विरूद्ध जाकर उन्हे 14% आरक्षण दिया है.

(33) संविधान द्वारा गठित मंडल कमीशन ने ओबीसी के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण दिया, परन्तु सुप्रीमकोर्ट ने 16 नबम्वर 1992 को फैसला देकर उस पर रोक लगा कर ओबीसी के साथ धोका किया है.

(33) हाल ही में गुजरात, राजस्थान और उ.प्र. हाईकोर्ट ने तथा सुप्रीमकोर्ट ने आरक्षण के संबंध में संविधान के विरूद्ध फैसले दिये हैं. इससे लगता है कि लोकतंत्र , संविधान और आरक्षण बड़े खतरे में है.

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